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Novel Hisar e Ana chapter 18 part 4 by Elif Rose new hindi novel

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आस पास जमा लोग अब उसे बुरा भला कह रहे थे।
“देखो…. म मतलब देखिए। मुझे समझने में गलती हो गई। पुलिस कॉल मत करिए।”
मौके पर गधे को बाप बनाने में वह माहिर था।
लेकिन सामने भी असफन्द मीर था।
“नहीं मैं करता हूं कॉल। अच्छा है बात क्लीयर हो जाए और मैं भी अपने नुक़सान का हर्जाना मांगू।”
“देखिए मुझे माफ कर दीजिए। गलतफहमी हो गई थी मुझे।”
“Are you sure?”
“हां, प्लीज़ पुलिस को कॉल मत करिए।”
वह किसी भी सूरत पुलिस के मामले में नहीं फंसना चाहता था।

“हम्म ठीक है।”
असफन्द ने मोबाइल वापस पैंट की जेब डाला और तमाशाई बने लोगों की तरफ मुड़ा।
“हमारे देश में तकरीबन 90% लोगों में यह आदत पाई जाती है कि किसी भी चीज़ या इंसान को लेकर बहुत जल्दी अपनी राय बना लेते हैं, बिना मामले को गहराई से जांचें परखे। अरे अल्लाह ने दिमाग़ किस लिए दिया है?
किसी भी छोटे बड़े एक्सिडेंट में ज़रूरी नहीं कि गलती हमेशा बड़ी गाड़ी वाले की हो।

यह आदमी जो ख़ुद को मज़लूम ज़ाहिर कर मौके का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहा था, अगर यह बिना बात का बतंगड़ बनाए शराफ़त से मुझसे इतने रुपयों की डिमांड करता तो मैं वाक़ई उसे उतनी रकम दे देता या शायद उससे ज़्यादा ही देता। लेकिन यह हरकत कर के इसने अपनी शख्सियत ज़ाहिर कर दी। ऐसे में इसकी डिमांड मैं हरगिज़ पूरी नहीं करूंगा। ताकि आगे से यह किसी की सिधाइयत का नाजायज़ फायदा उठाने से पहले हज़ार बार सोचे।”

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अपनी बात कह कर उसने अपना वॉलेट निकाला और फिर से हज़ार हज़ार के कुछ नोट निकाल कर बेइज्जती पर सुर्ख होते दानियाल के हाथ पर रखा।
“यह इतने ही पैसे हैं जितने में आपकी बाइक ठीक हो सके। मुझे वाकई आपके नुक़सान का अफ़सोस है।”
अपने दिल में उठते नफ़रत के उबाल को दबाते हुए दानियाल ने उसको देखा था जो अब जाकर अपनी कार में बैठ रहा था।
ज़िन्दगी में बहुत से नागवार लोगों से उसने डील किया था लेकिन इतनी नफ़रत उसे किसी से महसूस नहीं हुई थी जितनी इस अमीरज़ादे से हो रही थी जिसका उसे नाम तक नहीं पता था।

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लॉन में टहलते हुए राहेमीन अजीब से इज़्तेराब का शिकार थी।
तीन दिन हो गए थे और घर की फिज़ा में फैला सर्द पन अभी भी कम नहीं हुआ था।
सबीहा मीर अभी तक उससे बात नहीं कर रहीं थीं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह क्या करे कि सब पहले जैसा हो जाए। ज़िन्दगी ने ऐसे दोराहे पर ला खड़ा किया था कि हर तरफ़ अंधेरा नज़र आ रहा था।
आगे क्या होगा?
यह सोच उसे हौला रही थी।
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आगे का भाग पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करिए।

Hisar e ana chapter 18 part 5

नोट – इस कहानी को चुराने या किसी भी प्रकार से कॉपी करने वाले पर क़ानूनी कार्यवाही की जाएगी।

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Hisar e ana chapter 1

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